अमेरिका और ईरान के बीच महायुद्ध का बिगुल: ट्रम्प का ‘इकोनॉमिक डी-डे’ और मक्का-मदीना के पड़ोसियों को तेहरान की खुली धमकी!

पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठ चुका है और दुनिया महाविनाश की कगार पर खड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने ईरान को पूरी तरह से अपाहिज बनाने के लिए अपनी अब तक की सबसे क्रूर और विनाशकारी आर्थिक जंग का ऐलान कर दिया है, जिसे द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट में “आर्थिक डी-डे” (Economic D-Day) नाम दिया गया है।
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह किसी भी विरोधी के खिलाफ इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय हमला है। लेकिन ईरान ने भी घुटने टेकने से साफ मना कर दिया है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसन रजाई ने सीधे अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों को हड़काते हुए कहा है कि अगर ट्रम्प ने यह दुस्साहस किया, तो ईरान का पलटवार किसी विनाशकारी “भूकंप” जैसा होगा। ईरान ने खुलेआम धमकी दी है कि अगर खाड़ी देशों ने अमेरिका का साथ दिया, तो फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने दी जाएगी और उनके तमाम तेल ठिकानों को राख में तब्दील कर दिया जाएगा।
मुख्य टकराव के बिंदु:
अमेरिका की दादागिरी: डोनाल्ड ट्रम्प ने भड़काऊ बयान देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को “अमेरिकी क्षेत्र” घोषित कर दिया है, जिस पर वैश्विक स्तर पर भारी बवाल मचा हुआ है।
तेहरान का तीखा पलटवार: ईरान ने इस कदम को पूरी दुनिया के खिलाफ जंग का ऐलान और “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया है।
वैश्विक तेल संकट का खतरा: ईरान की संसद ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी टैक्स लगाने के बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे दुनिया भर में हाहाकार मचना तय है।
पड़ोसियों को अल्टीमेटम: ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी पाबंदियों में उनका सहयोग “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।
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