बिहान से बदली ग्रामीण महिलाओं की राह, 1.20 लाख के ऋण से शुरू किया मछली पालन

ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित ‘बिहान’ कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहा है। स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को ऋण और जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्थानीय संसाधनों और अपनी रुचि के अनुसार रोजगार गतिविधियां शुरू कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
लखनपुर विकासखंड के ग्राम पुहपुटरा की मुनिता स्व-सहायता समूह की सचिव निरा राजवाड़े भी इसी बदलाव की मिसाल हैं। बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर मछली पालन को आजीविका का जरिया बनाया। समूह ने 1 लाख 20 हजार रुपए का ऋण लेकर मछली पालन की गतिविधि शुरू की है।
समूह ने 10 वर्ष की लीज पर एक तालाब लिया है, जहां महिलाएं सामूहिक रूप से मछली पालन कर रही हैं। ऋण की राशि का इस्तेमाल आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने में किया जा रहा है। आने वाले समय में मछली की बिक्री से होने वाली आय से समूह की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की योजना है।
निरा राजवाड़े के मुताबिक मछली पालन में समूह की महिलाएं मिलकर तालाब की देखरेख, मछली पालन से जुड़े कार्य और भविष्य में मछलियों की बिक्री की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इस गतिविधि से महिलाओं को गांव में ही रोजगार का अवसर मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि बिहान से जुड़ने से पहले उनके पास नियमित आजीविका का कोई साधन नहीं था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सामूहिक रूप से काम करने और आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य को लेकर नई उम्मीद पैदा हुई है।
मुनिता समूह के लिए मछली पालन महज कमाई का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ाया गया कदम है। समूह को मिले ऋण का इस्तेमाल उत्पादन आधारित गतिविधि में किया जा रहा है। इससे होने वाली आय महिलाओं की व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने में भी मददगार होगी।
निरा राजवाड़े ने कहा कि बिहान के माध्यम से महिलाओं को संगठित होकर काम करने, ऋण प्राप्त करने और अपनी आजीविका शुरू करने का अवसर मिला है। समूह की महिलाएं मेहनत और सामूहिक प्रयास से आय बढ़ाने के साथ ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने बिहान के माध्यम से मिले सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि मछली पालन के जरिए समूह की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है और महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिलने से परिवार में उनकी आर्थिक भूमिका भी मजबूत हुई है।
मुनिता स्व-सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सामूहिक प्रयास, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और संस्थागत सहयोग से आजीविका बढ़ाने का उदाहरण बन रही है। तालाब आधारित मछली पालन के जरिए महिलाएं नियमित आय के अवसर विकसित करने और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर बढ़ने का प्रयास कर रही हैं।




