A new path for education in the forests of Narayanpur: ‘School Keinta’ transforms the lives of children.

नारायणपुर के जंगलों में शिक्षा की नई राह, ‘स्कूल केईन्ता’ से बदली बच्चों की तस्वीर

छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिले नारायणपुर में जिला प्रशासन की पहल ‘स्कूल केईन्ता’ दूरस्थ और दुर्गम वनांचलों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उनके जरूरी दस्तावेज भी तैयार करा रही है। अभियान के तहत ऐसे इलाकों में स्कूल की सुविधा पहुंचाई जा रही है, जहां भौगोलिक कठिनाइयों के कारण बच्चों के लिए पढ़ाई करना बड़ी चुनौती थी।

22 बच्चों को मिले जाति प्रमाण पत्र

संकुल केंद्र गारपा के अंतर्गत ग्राम घमंडी की वैकल्पिक प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले 22 बच्चों को हाल ही में जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रमाण पत्र मिलने से बच्चों और उनके अभिभावकों को सरकारी योजनाओं तथा आगे की शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

10 किलोमीटर पैदल जाने की मजबूरी खत्म

पहले घमंडी गांव के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर कोड़ेनार जाना पड़ता था। दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होती थी। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन ने गांव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला शुरू की। वर्तमान में यहां 30 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

34 वैकल्पिक शालाओं से 2 हजार से ज्यादा बच्चे जुड़े

‘स्कूल केईन्ता’ अभियान के तहत जिले के बेहद दुर्गम और भौगोलिक रूप से कटे क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं। अभियान के जरिए अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

अभियान की खास बात यह है कि बच्चों को सिर्फ स्कूल तक पहुंचाने पर जोर नहीं दिया जा रहा, बल्कि जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य जरूरी दस्तावेज भी स्थानीय स्तर पर तैयार कराए जा रहे हैं। इससे बच्चों को सरकारी योजनाओं और भविष्य की शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

4rtheye web Desk
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