1 नवंबर 2026 की सुबह तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ, जिसने मेडिकल जगत और समाज के चेहरे से नकाब उतार कर फेंक दिया है। पुलिस ने छापेमारी कर ‘एग डोनेशन’ यानी अंडाणु दान के आड़ में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानव शोषण और मेडिकल रैकेट का भंडाफोड़ किया है। मौके से यूपी, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों की 43 लाचार और गरीब महिलाओं को सुरक्षित बचाया गया, जिन्हें धोखे से और आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर इस दलदल में घसीटा गया था। आठ शातिर आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब कई बड़े प्राइवेट फर्टिलिटी क्लिनिकों और डॉक्टरों की गर्दन भी फंसती नजर आ रही है।
जांच में जो बातें निकलकर सामने आई हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से गरीब महिलाओं को अच्छी नौकरी और एक झटके में बड़ी रकम दिलाने का लालच देकर हैदराबाद लाया जाता था। इसके बाद उन्हें गुप्त ठिकानों पर बंधक बनाकर रखा जाता था और उनके शरीर में खतरनाक हार्मोनल इंजेक्शन ठूंस-ठूंसकर बार-बार उनके अंडाणुओं को निकाला जाता था। यह प्रक्रिया महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा होती है, लेकिन चंद पैसों के लालच में दलालों और कॉर्पोरेट अस्पतालों ने महिलाओं के जिस्म को सिर्फ एक फैक्ट्री बना डाला।
घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश का ज्वाला फूट पड़ी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर स्वास्थ्य विभाग और इंटेलिजेंस की नाक के नीचे इतना बड़ा काला धंधा महीनों से कैसे चल रहा था? क्या बड़े फर्टिलिटी सेंटर और नामचीन डॉक्टर इस रैकेट में सीधे शामिल नहीं हैं? पुलिस की शुरुआती कार्रवाई ने 8 आरोपियों को सलाखों के पीछे धकेल दिया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि इस पूरे सिंडिकेट के तार विदेशी खरीदारों और सरोगेसी के अवैध नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
इस दिल दहला देने वाले रैकेट ने भारत के आईवीएफ और एग डोनेशन इंडस्ट्री में फैले काले सच को सरेआम उजागर कर दिया है। लाचार महिलाओं की बेबसी का सौदा करने वाले इन सफेदपोश भेड़ियों के खिलाफ अगर देशव्यापी जांच नहीं बैठाई गई, तो एग डोनेशन के नाम पर गरीब बेटियों का यह कत्लेआम यूं ही जारी रहेगा।















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