चुनाव आयोग का निष्पक्षता पर सीधा वार? टीएमसी का नाम और सिंबल किया फ्रीज, भड़के राहुल गांधी बोले- ‘पूरी पार्टी ही चोरी हो गई!’

लोकतंत्र के सबसे बड़े पहरेदार यानी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उप-चुनावों से ठीक पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक अंतरिम आदेश जारी कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों को पार्टी के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इस फैसले के आते ही देश की राजनीति में भूचाल आ गया है और विपक्षी खेमे ने इसे सत्ताधारी दल की शह पर लोकतंत्र का चीरहरण करार दिया है।
इस विवादित फैसले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के गठजोड़ पर हमला बोला है। राहुल ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस- बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर हर बार एक ही पैटर्न दोहराते हैं। जब पूरी की पूरी पार्टी ही गायब और चोरी की जा सकती है, तो देश के करोड़ों लोगों का वोट चोरी होना कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने इस कदम को देश के लोकतांत्रिक ढांचे के पतन का सबसे खतरनाक सबूत बताया है।
संवैधानिक संस्थाओं का इस तरह से राजनीतिक इस्तेमाल किसी भी जीवंत लोकतंत्र के लिए विनाशकारी है। जब जनता के चुने हुए जनादेश और राजनीतिक पहचान पर प्रशासनिक आदेशों से डाका डाला जाने लगे, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद करना बेमानी हो जाता है। विपक्ष का यह गुस्सा सिर्फ एक पार्टी का नहीं, बल्कि तानाशाही के खिलाफ पूरे देश की आवाज़ बनता जा रहा है।



