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दो साल बाद मानसून कमजोर, क्या देश की अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा बड़ा संकट

भारत में 2026 का मानसून सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है, जिसने कृषि और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल बारिश लंबी अवधि के औसत का सिर्फ 92% रह सकती है, जो लगभग तीन दशकों में सबसे कम स्तरों में से एक है।

इस कमी का मुख्य कारण एल नीनो प्रभाव को माना जा रहा है, जो आमतौर पर गर्म और शुष्क मौसम लाता है। हालांकि, बाद में सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल कुछ राहत दे सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून की अहम भूमिका है, क्योंकि कृषि क्षेत्र की 70% जल जरूरतें इसी पर निर्भर करती हैं। ऐसे में बारिश कम होने से फसल उत्पादन, खाद्य कीमतों और निर्यात पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर महंगाई और GDP ग्रोथ पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि महंगाई 4.5% से ऊपर जा सकती है और आर्थिक विकास दर प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा, खाद्य तेलों के आयात में बढ़ोतरी और चीनी जैसे उत्पादों के निर्यात में कमी भी देखने को मिल सकती है।

यह स्थिति सरकार और नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता खर्च दोनों प्रभावित होंगे।

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