छत्तीसगढ़ समाचार: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला—सिप्ला कंपनी पर लगा 3 साल का ब्लैकलिस्टिंग बैन रद्द

बिलासपुर (30 जून 2026): छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court of Chhattisgarh) से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने दवा निर्माता कंपनी ‘सिप्ला’ (Cipla) के खिलाफ छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 3 साल के ब्लैकलिस्टिंग आदेश को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया है। यह मामला कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की आपूर्ति से जुड़ा हुआ था।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल “सांकेतिक मात्रा” (Indicative Quantity) शब्द का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियां आपूर्ति करने वाली कंपनियों पर असाधारण मांग का दबाव नहीं बना सकतीं। इसके अलावा, परिस्थितियों का आकलन किए बिना किसी कंपनी को इस तरह से दंडित करना न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने पाया कि कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान सिप्ला कंपनी लगातार संबंधित अधिकारियों को कच्चे माल की कमी, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं, कम विनिर्माण क्षमता और केंद्र सरकार के आवंटन दिशानिर्देशों के बारे में सूचित कर रही थी। इन सभी वास्तविक और आपातकालीन कारणों पर विचार किए बिना राज्य एजेंसी द्वारा कंपनी की सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit) को जब्त करना और उसे 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करना पूरी तरह से मनमाना, अनुचित और असंगत था। इस फैसले से फार्मास्युटिकल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है और यह प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता की वकालत करता है।




