EWS-LIG आवास में छत्तीसगढ़ का मॉडल देश में नंबर-1, 25 हजार से ज्यादा घरों के लिए बिना सरकारी खर्च मिली जमीन

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। EWS-LIG वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और Affordable Housing in Partnership (AHP) मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन को भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के तौर पर सम्मानित किया है।
विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और SUDA के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सुमित अग्रवाल ने पुरस्कार ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दे रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति से लेकर भूमि उपलब्धता, निर्माण गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक निगरानी की जा रही है।
बिना सरकारी खर्च 25,413 आवासों के लिए मिली जमीन
शहरी गरीबों के लिए आवास निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती जमीन की उपलब्धता रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी कॉलोनियों में EWS और LIG वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया। इसका नतीजा यह रहा कि राज्य में 25,413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के जमीन उपलब्ध हुई।
इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत 17,790 और PMAY-U 2.0 के तहत 7,623 आवास शामिल हैं।
इस व्यवस्था की खास बात यह है कि गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के आवास केवल शहरों के बाहरी हिस्सों तक सीमित नहीं रहेंगे। नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों में आवास मिलने से लाभार्थियों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और अन्य नागरिक सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।
जमीन से निर्माण तक तैयार किया पूरा सिस्टम
राज्य सरकार ने AHP मॉडल के तहत भूमि उपलब्ध कराने के साथ परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और SUDA ने नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर शहरी गरीब परिवारों के लिए किफायती आवास की प्रक्रिया को गति दी है।
इसी पूरी कार्यप्रणाली को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में मान्यता दी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA और नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा AHP के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की पहल को राष्ट्रीय पहचान मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का मकान सिर्फ चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी इस सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने सिर्फ योजना बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन उपलब्ध कराने से लेकर किफायती घर के निर्माण तक पूरी व्यवस्था विकसित की है।
यह राष्ट्रीय सम्मान छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ शहरी गरीब परिवारों को सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के प्रयासों को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।




