दिल्ली मतदाता सूची विवाद: 33 लाख नामों पर कैंची, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची जंग!

दिल्ली की राजनीति में भूचाल आ गया है! चुनाव आयोग के स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) अभियान के तहत 33 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों में गड़बड़ी का दावा करते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे चुका है। विपक्ष का साफ आरोप है कि यह जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन है, जबकि प्रशासन इसे केवल डेटा सुधार प्रक्रिया करार दे रहा है।
विपक्ष ने हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के आड़ में वास्तविक वोटरों के अधिकार छीने जा रहे हैं। मामला तब और भड़क गया जब पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और वरिष्ठ नेताओं के नाम भी इस संदेहास्पद सूची में सामने आए। सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को याचिका पर सुनवाई तय होने के बाद से राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। अब देखना यह होगा कि शीर्ष अदालत इस चुनावी घमासान पर क्या कड़ा रुख अपनाती है।
लोकतंत्र में वोटिंग अधिकार सबसे बड़ा हथियार है और इस तरह लाखों लोगों के नाम पर संशय खड़ा करना सीधे तौर पर व्यवस्था पर सवाल उठाता है।




