‘फारस की खाड़ी में आग बरसेगी, एक-एक बेस श्मशान बनेगा’— ट्रंप की खुली धमकी के बाद अमेरिका ने ईरान पर दागीं विनाशकारी मिसाइलें!

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे वीभत्स और घातक दौर में पहुंच चुकी है। 22 और 23 जुलाई की दरमियानी रात अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने ईरान पर लगातार 11वीं रात भी भयंकर हवाई हमले किए। करीब 75 मिनट तक चले इस जलजले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों को छलनी कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में किसी भी जहाज पर हमला करने की हिमाकत की, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुल और अंडरग्राउंड ठिकानों को जमींदोज कर देगा। ट्रंप ने खासतौर पर ईरान के अति-सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) को पूरी तरह नष्ट करने की धमकी दी है।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी ड्रोन हमले किए हैं। ईरान की थलसेना ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर ईरान के खतरनाक ‘अराश’ सुसाइड ड्रोनों ने हमला बोलकर अमेरिकी हैंगरों और गोदामों को तबाह कर दिया। जॉर्डन में भी अमेरिकी ठिकाने ईरानी मिसाइलों की चपेट में आए।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संसद में साफ कह दिया है कि इस जंग की कीमत $37.5 अरब पार कर चुकी है और उन्होंने युद्ध को और आक्रामक बनाने के लिए $70 अरब के नए इमरजेंसी फंड की मांग की है। उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोटूक लहजे में कहा कि स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में ईरान का कब्जा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाड़ी देश और लाल सागर पूरी तरह युद्ध के मुहाने पर हैं और आने वाले 24 घंटे पूरी दुनिया के लिए भारी साबित हो सकते हैं।




