कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और हरित ऊर्जा को मिलेगा नया आधार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में तीन प्रमुख योजनाओं और नीतियों पर सहमति बनी, जिनका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और प्रदेश में सतत विकास को गति देना है।
कैबिनेट ने “विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़” के प्रारूप को मंजूरी दी। योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। इसके माध्यम से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और आजीविका से जुड़े स्थायी परिसंपत्तियों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60:40 होगी तथा वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना शुरू करने का भी फैसला लिया गया। इसके अंतर्गत हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, कृषि उपकरण मरम्मत, डिजिटल सेवाएं और विपणन केंद्र विकसित किए जाएंगे। योजना का लक्ष्य स्थानीय उत्पादन और बाजार व्यवस्था को मजबूत बनाते हुए ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके संचालन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को सौंपी गई है।
इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” को भी मंजूरी प्रदान की। नई नीति के तहत कृषि अवशेष, पशुधन अपशिष्ट और नगरीय कचरे जैसे जैविक संसाधनों का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और जैव उर्वरक निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन सीबीजी उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए इस नीति को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




