मेटा का भारत सरकार के आगे सरेंडर या ढोंग? बाल यौन शोषण पर दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप!

एनसीपीसीआर (NCPCR) के कड़े रुख और समन की मार के बाद दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) ने घुटने टेक दिए हैं। इंस्टाग्राम पर चल रहे बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के धंधे पर चौतरफा घिरी मेटा ने अब भारत के साइबर क्राइम पोर्टल (I4C) को सीधे रिपोर्टिंग करने का दावा किया है।
यह पूरा विवाद तब भड़का जब यह खुलासा हुआ कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापनों को मंजूरी मिल रही थी जो यूजर्स को टेलीग्राम के उन चैनलों पर भेज रहे थे जहाँ बच्चों का आपत्तिजनक कंटेंट बेचा जा रहा था। एनसीपीसीआर ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर को 16 सितंबर को निजी तौर पर पेश होने का हुक्म सुनाया। कानूनी शिकंजा कसता देख मेटा ने घोषणा की कि अब वह अमेरिकी एजेंसी के बजाय सीधे भारतीय गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल पर ऐसे मामलों की रिपोर्ट दर्ज कराएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि करोड़ों कमाने वाली यह टेक कंपनी इतने समय तक भारतीय कानूनों को ठेंगे पर रखकर क्या सो रही थी? क्या सिर्फ सीधे रिपोर्टिंग करने का शिगूफा छोड़कर मेटा अपनी आपराधिक लापरवाही से बच सकती है?
इंटरनेट और सोशल मीडिया को बच्चों की सुरक्षा के लिए आदमखोर भेड़ियों का अड्डा नहीं बनने दिया जा सकता। भारत सरकार को सिर्फ रिपोर्टिंग सिस्टम बदलने से संतुष्ट होने के बजाय मेटा के शीर्ष अधिकारियों की आपराधिक जवाबदेही तय करनी होगी ताकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत को अपनी मनमानी का अड्डा न समझें।



