लाल किले से PM मोदी का बड़ा संदेश: ‘शक्ति की सप्तधारा’ से विकसित भारत का रोडमैप, सेमीकंडक्टर से रक्षा तक आत्मनिर्भरता पर जोर

नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया और भारत की विकास यात्रा, आत्मनिर्भरता, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर अपना विजन सामने रखा। प्रधानमंत्री के संबोधन में ‘शक्ति की सप्तधारा’ विशेष रूप से प्रमुख रही। यह सात धाराओं के जरिए भारत के विकास की दिशा तय करने वाला रोडमैप है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत की पिछले 12 वर्षों की परिवर्तन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को विकास की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया और सेमीकंडक्टर उत्पादन को लेकर भारत की प्रगति पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट उत्पादन शुरू कर चुके हैं और आने वाले वर्षों में पांच से आठ और संयंत्र आने की उम्मीद है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चिप निर्माण आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण होगा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल तकनीक और आधुनिक उद्योगों में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक पर जोर दिया। उन्होंने भारत को हाइपरसोनिक और अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों में नेतृत्व करने की जरूरत बताई। रक्षा उत्पादन और आधुनिक सैन्य क्षमता को विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा गया।
इससे एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख किया था। उनके मुताबिक देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
प्रधानमंत्री के संबोधन में ऊर्जा क्षेत्र भी महत्वपूर्ण रहा। विकसित भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और स्वदेशी क्षमता को आवश्यक बताया गया। प्रधानमंत्री के भाषण के प्रमुख बिंदुओं में सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भरता शामिल रहे।
स्वतंत्रता दिवस के इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की सामूहिक शक्ति को विकसित भारत के लक्ष्य के केंद्र में रखा। सरकार की ओर से इसे भारत की आगामी विकास यात्रा के लिए व्यापक दृष्टिकोण के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।



