रायपुर: नगर निगम में ‘भ्रष्टाचार’ को कहा जाता है ‘शिष्टाचार’ ?

रायपुर:  रायपुर नगर निगम में ‘भ्रष्चार’ को ‘शिष्टाचार’ का नाम दिया गया है, ये हम नहीं कह रहे हैं वे लोग कहते हैं, जो रायपुर नगर निगम में अपने छोटे बड़े काम लेकर जाते हैं, जी हां लोग कहते हैं कि यहां पर आम आदमी बिना पैसे खर्च किये अपना काम निकाले ऐसा मुमकिन नहीं होता ।

हमने इसी को लेकर अपने चैनल पर लोगों से सवाल किया था, जवाब में हमें 242 वोट मिले जिसमें लोगों ने क्या कहा आप खुद पढ़ लीजिये ।

1 2FOURTH EYE NEWS के सवाल पर हमें करीब 242 लोगों ने वोट किया, जिसमें हैरानी वाली बात ये है, कि करीब 95 फीसदी लोगों ने  कहा कि रायपुर नगर निगम में बिना पैसे लिए कोई काम नहीं होता. जबकि महज 5 फीसदी लोग ही मानते हैं, नगर निगम में बिना पैसे लिए काम होता है ।

नोट- हमारा ऑनलाइन सर्वे देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें  https://www.youtube.com/channel/UCwMyzCZtrR0m0iILnCpk3TQ/community?view_as=subscriber

अजीत राठौर दवा कर रखते हैं फाइल ?

अजीत राठौर जो कि रायपुर नगरनिगम जोन-2 में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत है, आरोप है कि वो जानबूझकर फाइलों को दबा लेते हैं, और जबतक उनके मन का काम पूरा नहीं होता तब तक फाइल को आगे नहीं बढ़ाते और एक ही फाइल में बार-बार अडंगा लगाकर रोक देते हैं, ऐसा ही एक केस जिसका फाइल नंबर 14202 है, जिसे भवन निर्माण की परमिशन के लिए ऑनलाइन 3/07/18 को सबमिट किया गया था,  लेकिन आजतक फाइल पेंडिंग है, सब इंजिनीयर अजीत राठौर उसमें हर बार एक नई कहानी बनाकर फाइल को वापस रिटर्न कर देते हैं  ।

ऑनलाइन सिस्टम भी महज खानापूर्ती ?

 

हालांकि रायपुर नगर निगम में आम लोगों की सहूलियत को देखते हुए ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया है, जिसमें आवेदक को निगम के चक्कर काटने की जरूरत न पड़े, लेकिन कर्मचारियों की मनमानी के चलते ये सिस्टम महज खानापूर्ती दिखाई देता है, वो इसलिये क्योंकि पूरे दस्तावेज स्कैन कर सबमिट करने के बाद भी पूरे दस्तावेज कोई न कोई बहाना कर बुलाए जाते हैं, आरोप है कि साइट विजिट के लिए भी आवेदक को बुलाया जाता है और कई तरह के डर दिखाकर पैसों की मांग की जाती है ।

किसी न किसी कमी की बदौलत रुकती हैं फाइलें – जोन कमिश्नर

रापुयर जोन-2 के कमिश्नर अपने कर्मचारियों का बचाव करते हुए बताते हैं, कि कई बार आर्किटेक्ट किसी न किसी तरह की कमी भवन निर्माण के नक्शे में छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से भवन निर्माण का नक्शा पास होने में देरी हो जाती है, वहीं उन्होने हमारी वोटिंग में 242 लोगों की उस वोटिंग को भी नकार दिया जिसमें कहा गया था कि, रायपुर नगर निगम में बिना पैसे कोई काम नहीं होता, जोन कमिश्नर ने बताया कि हमारी छबि लोगों की नजरों में साफ सुथरी है ।

एक सवाल – एक बार में क्यों नहीं बताई जाती कमियां ?

हालांकि जोन कमिश्नर अपने कर्मचारियों का बचाव करते जरूर दिखाई देते हैं, लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर रायपुर नगर निगम में इतनी ही पारदर्शिता है तो 95 फीसदी लोग क्यों मानते हैं कि रायपुर नगर निगम में बिना पैसे लिए कोई काम नहीं होता, और नगर निगम के अधिकारी एक बार में पूरे दस्तावेजों का अध्यन कर क्यों आवेदक को नहीं बताते, जिससे एक ही बार में सारी कमियां दूर की जा सके ?

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