भटके रास्तों से वापसी: पुनर्वास नीति ने बदली युवाओं की ज़िंदगी, अब बनेंगे आत्मनिर्भर

रायपुर। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति अब ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रही है। कोण्डागांव जिले में पहले हिंसा के रास्ते पर भटके युवा अब मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। कौशल विकास कार्यक्रम उनके जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।
ग्राम कुधुर के तुलसी राम, रजमन और गोबरू वर्तमान में जिले के पुनर्वास केन्द्र में रहकर लाइवलीहुड कॉलेज के जरिए इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का प्रशिक्षण ले रहे हैं। तुलसी राम कश्यप बताते हैं कि पहले क्षेत्र में असुरक्षा और डर के माहौल के कारण वे गलत रास्ते पर चले गए थे, लेकिन पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
फिलहाल वे वायरिंग का दो महीने का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिसमें शुरुआती 15 दिन पूरे हो चुके हैं। प्रशिक्षण के बाद वे अपने ही गांव में स्वरोजगार शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
रजमन और गोबरू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने भी पुनर्वास नीति का लाभ लेकर नई शुरुआत की है और अब प्रशिक्षण के बाद अपने गांव में रोजगार स्थापित कर परिवार का सहारा बनने की तैयारी कर रहे हैं।
तीनों युवाओं का कहना है कि पहले जहां डर और अस्थिरता थी, अब वहां सुरक्षा और उम्मीद का माहौल है। इस पहल ने उन्हें नई जिंदगी शुरू करने का मौका दिया है।
राज्य सरकार की इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर दिए जा रहे हैं। कोण्डागांव जिला प्रशासन द्वारा संचालित पुनर्वास केन्द्र इन युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में अहम भूमिका निभा रहा है।




