सुप्रीम कोर्ट की दोटूक सुनाने के बाद देश में बहस तेज: ‘वंदे मातरम’ गाने के लिए किसी पर नहीं थोपा जा सकता जबरन नियम

देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर भारत के संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ न गाने के आधार पर किसी भी नागरिक को दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।
कर्नाटक संगीत के मशहूर गायक टीएम कृष्णा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि देशभक्ति दिल से आती है, इसे किसी पर जबरन कानूनी डंडे से नहीं थोपा जा सकता। अदालत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर तीखी बहसें जारी हैं।
यह फैसला साबित करता है कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी और परिपक्व हैं। जहां एक तरफ देश की संप्रभुता सर्वोपरि है, वहीं संविधान प्रत्येक नागरिक को उसकी वैचारिक स्वतंत्रता की सुरक्षा भी प्रदान करता है। भारत का संविधान ही हमारी असली पहचान है और न्यायपालिका ने इसे एक बार फिर मुस्तैदी के साथ साबित कर दिखाया है।
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