महाशक्ति का दिवालियापन! महाविनाशक ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ में अमेरिका ने गंवाए 50 अरब डॉलर और वैश्विक साख, खोखली हुई सैन्य धौंस!

ईरान के खिलाफ 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिकी-इजराइली सैन्य अभियान, जिसे अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ का कोडनेम दिया था, ने दुनिया के सबसे अमीर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है। पेंटागन के लीक हुए वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, इस युद्ध में अमेरिकी करदाताओं के सीधे 29 अरब डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) पानी की तरह बह चुके हैं। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि यदि नष्ट हुए युद्धपोतों और सैन्य ठिकानों की मरम्मत का खर्च जोड़ें, तो यह नुकसान 50 अरब डॉलर के पार जा चुका है।
इस युद्ध में अमेरिका ने जो रणनीतिक साख और सैन्य शक्ति खोई है, उसकी भरपाई नामुमकिन है। सीनेटर मार्क केली ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ शुरुआती चार दिनों में ही अपने ‘पैट्रियट मिसाइल’ का बहुत बड़ा स्टॉक दाग दिया, जिसके चलते अमेरिकी रक्षा भंडार अब पूरी तरह खाली हो चुका है। आर्थिक मोर्चे पर, हॉर्मुज ब्लॉक होने के कारण वैश्विक ईंधन संकट खड़ा हो गया, जिससे अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था और वर्ष 2026 की जीडीपी (GDP Growth) पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।
सबसे शर्मनाक रणनीतिक हार यह है कि 28 फरवरी को पहले ही हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को मार गिराने और ईरान के खिलाफ 900 से अधिक हवाई हमले करने के बावजूद, अमेरिका न तो ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) कर पाया और न ही उसके परमाणु हौसलों को कुचल सका। अमेरिका ने इस जंग में अपने जांबाज सैनिक खोए, वैश्विक अपमान झेला और बदले में पाया सिर्फ आर्थिक दिवालियापन।




