होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दादागिरी को ईरान की खुली चुनौती: ट्रम्प के अल्टीमेटम को तेहरान ने बताया ‘पाखंड’, जंग का सीधा ऐलान!

पश्चिम एशिया के बारूदी मुहाने पर तनाव अब अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के बढ़ते जमावड़े और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दी गई भीषण सैन्य हमले की चेतावनियों के बीच ईरान ने घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया है। बीते 24 घंटों में तेहरान ने अमेरिकी अल्टीमेटम को ‘मनोवैज्ञानिक पाखंड’ करार देते हुए यह साफ कर दिया है कि जब तक वाशिंगटन अपनी आक्रामक नीतियों को वापस नहीं लेता, तब तक रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को किसी भी कीमत पर खोला नहीं जाएगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने तटीय इलाकों में एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन की नई खेप तैनात कर अमेरिका को सीधा संदेश दिया है कि अगर उसने दुस्साहस किया तो उसका अंजाम बेहद घातक होगा।.
वाशिंगटन से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति भवन ने शुरुआत में सैन्य कार्रवाई को टालने की बात करते हुए समझौते का गुब्बारा छोड़ा था, लेकिन तेहरान के सख्त और आक्रामक रुख ने अमेरिकी प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। ईरान की शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध और तेल टैंकरों पर लगाया गया नाका केवल एकतरफा दादागिरी है, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा। ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों को ‘रेड अलर्ट’ पर रख दिया गया है और फारस की खाड़ी में गश्त कर रहे अमरीकी युद्धपोतों की पल-पल की निगरानी की जा रही है।
इस महा-टकराव का सबसे भयानक असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया के कुल कच्चे तेल के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से की आवाजाही ठप पड़ गई है। अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरान ने दो और अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों की आवाजाही को अपने कड़े नियंत्रण में ले लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। वाशिंगटन की बौखलाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्य पूर्व में स्थित अपने सभी दूतावासों को उसने अमेरिकी नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने या इलाका छोड़ने की एडवायजरी जारी करने पर मजबूर होना पड़ा है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस बार ईरान के रणनीतिक प्रतिरोध का सही आकलन करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। तेहरान ने न केवल अमेरिकी नौसेना के राडार और संचार प्रणालियों को जाम करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है, बल्कि उसने स्पष्ट कर दिया है कि यदि वाशिंगटन ने कोई भी मिसाइल या हवाई हमला किया तो उसका पहला निशाना मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे होंगे। खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकाने अब ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों की सीधी जद में हैं। ईरान के कार्यकारी रक्षा मंत्री मजीद इब्न अल-रज़ा ने आज सुबह पत्रकारों को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में कहा, “हम अमेरिका की किसी भी गीदड़ भभकी से डरने वाले नहीं हैं। अगर पेंटागन ने एक भी गोला दागा, तो फारस की खाड़ी अमेरिकी सैनिकों का कब्रिस्तान बन जाएगी।”
इतना ही नहीं, ईरान ने अपनी परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा को भी अभेद्य बना दिया है। अमेरिका द्वारा दबाव बनाने की रणनीति पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है। तेहरान का रुख स्पष्ट है—या तो अमेरिका अपनी मनमानी बंद करे और सैन्य बल वापस बुलाए, या फिर एक ऐसे चौतरफा युद्ध के लिए तैयार रहे जिसकी आंच पूरे पश्चिमी जगत को झुलसा कर रख देगी। अगले 24 घंटे इस क्षेत्रीय युद्ध की दशा और दिशा तय करने के लिए सबसे निर्णायक माने जा रहे हैं।




