पीपल के पेड़ की पूजा का पौराणिक और वैज्ञानिक सच: जानिए क्यों रविवार को नहीं चढ़ाते जल

(Fourth Eye News): हिंदू परंपराओं में पीपल के वृक्ष को देवतुल्य माना गया है। शनिवार और विशेष अवसरों पर पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने और जल चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
पौराणिक मान्यता
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है— “वृक्षाणां अश्वत्थः” अर्थात मैं सभी वृक्षों में पीपल हूँ। शास्त्रों की मान्यता अनुसार पीपल की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और अग्रभाग में शिव जी का वास होता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक रूप से पीपल का पेड़ पर्यावरण के लिए सबसे अधिक लाभदायक माना जाता है। यह उन चुनिंदा वृक्षों में से है जो 24 घंटे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं और वातावरण को शुद्ध रखते हैं।
रविवार को जल क्यों नहीं चढ़ाया जाता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन पीपल के पेड़ पर अलक्ष्मी (दरिद्रता) का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करना या उसके पास जाना वर्जित बताया गया है।


