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खाड़ी में मची तबाही से दुनिया बेहाल, पर भारत की अर्थव्यवस्था ‘अंगद का पैर’! युद्ध के थपेड़ों को झेलकर बना ग्लोबल विनर

The world reels from the devastation in the Gulf, yet India's economy stands unshakeable—firm as 'Angad's foot'. It has weathered the shocks of war to emerge a global winner.

युद्ध की विभीषिका से वैश्विक शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस महासंकट में भी जो मजबूती दिखाई है, उसने पश्चिमी देशों के बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के होश उड़ा दिए हैं। पिछले 24 घंटों के आर्थिक डेटा और समीक्षाओं से साफ हुआ है कि भारत ने ‘ईरान युद्ध के सबसे कड़े स्ट्रेस टेस्ट’ को सफलतापूर्वक पास कर लिया है। जहां यूरोप और चीन इस वक्त ऊर्जा संकट के कारण गंभीर मंदी की कगार पर खड़े हैं, वहीं भारत के प्रमुख आर्थिक संकेतक (Economic Indicators) पूरी तरह से हरे निशान में चमक रहे हैं।

मोदी सरकार द्वारा पिछले कुछ महीनों में किए गए रणनीतिक तेल भंडारण और वैकल्पिक व्यापार मार्गों (जैसे आईएमईसी और रूस से निरंतर आपूर्ति) ने भारत को होर्मुज की खाड़ी के बंद होने के झटके से पूरी तरह सुरक्षित रखा है।

यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक और आर्थिक विजय है। वैश्विक निवेशकों का भरोसा अब चीन या मध्य पूर्व से उठकर पूरी तरह भारत पर टिक गया है। पिछले 24 घंटों में भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का प्रवाह लगातार जारी रहने की संभावनाओं को बल मिला है। हालांकि, मौसम विभाग द्वारा अल नीनो (El Nino) को लेकर कुछ चिंताएं जताई गई हैं, लेकिन युद्ध के मोर्चे पर भारत ने अपनी आर्थिक संप्रभुता का लोहा मनवाया है। संभावनाएं बताती हैं कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो वैश्विक विनिर्माण (Global Manufacturing) और तकनीकी हब के रूप में भारत की स्थिति इतनी मजबूत हो जाएगी कि चीन को पछाड़ना बेहद आसान हो जाएगा। भारत ने साबित कर दिया है कि वह अब वैश्विक संकटों से डरता नहीं, बल्कि उन्हें अपने पक्ष में भुनाना जानता है।