संयुक्त राष्ट्र संघ का अपमान: अमेरिका ने फलस्तीनी राष्ट्रपति का वीजा रोका, यूएन के औचित्य पर उठे गंभीर सवाल!

न्यूयॉर्क में शुरू हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक से पहले एक बहुत बड़ा कूटनीतिक भूचाल आ गया है। अमेरिका ने अपनी हठधर्मी दिखाते हुए फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका में कदम रखने के लिए वीजा देने से साफ इनकार कर दिया है। इस वजह से इतिहास में लगातार दूसरी बार फलस्तीनी राष्ट्रपति को यूएन महासभा को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करना पड़ेगा।
विश्व पटल पर शांति और तटस्थता का ढोंग करने वाले अमेरिका के इस दोहरे चरित्र की चौतरफा धज्जियां उड़ रही हैं। दुनिया भर के नेताओं ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे बहुपक्षीय कूटनीति के लिए एक करारा थप्पड़ बताया है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के 80 साल के इतिहास में यह घटना एक काले धब्बे की तरह है, जिसने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक संस्थाएं अब केवल शक्तिशाली देशों की कठपुतली बनकर रह गई हैं और वैश्विक मंच पर निष्पक्षता नाम की कोई चीज नहीं बची है।




