अमेरिकी टैरिफ की गीदड़भभकी बेअसर! भारत अपनी शर्तों पर खरीदेगा कच्चा तेल, वॉशिंगटन के दबाव को भारत ने कचरे के डिब्बे में फेंका

अमेरिकी सीनेट द्वारा रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक प्रतिबंध और 100% तक टैरिफ लगाने का बिल पारित किए जाने के बावजूद, भारत ने वॉशिंगटन की इस गीदड़भभकी को ठेंगा दिखा दिया है। अमेरिका की इस बौखलाहट भरी चाल का भारत पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ा है। भारत सरकार ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और 140 करोड़ भारतीयों का हित भारत की प्राथमिक नीति है, और भारत अपनी जरूरत के हिसाब से जहां से चाहेगा, अपनी शर्तों पर रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदता रहेगा।
अमेरिकी संसद में पास हुआ यह कड़ा बिल दरअसल पश्चिमी देशों की उस हताशा का परिणाम है, जिसमें वे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को झुकाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अमेरिकी विश्लेषक खुद इस बात से कांप रहे हैं कि यदि उन्होंने भारत पर कोई भी वित्तीय प्रतिबंध या टैरिफ थोपने की हिमाकत की, तो भारत का आक्रामक जवाब अमेरिकी अर्थव्यवस्था और इंडो-पैसिफिक में उनकी रणनीति को तबाह कर देगा। भारत का स्पष्ट मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत का दबदबा इतना मजबूत है कि अमेरिका कोई भी एकतरफा कदम उठाने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर है।
भारत की तेल रिफाइनरियों और विदेश मंत्रालय के आक्रामक रुख ने पश्चिमी दादागिरी की कमर तोड़ दी है। भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि आर्थिक नीतियां वॉशिंगटन के दफ्तरों से नहीं, बल्कि नई दिल्ली की संप्रभु सरकार द्वारा तय की जाती हैं। अमेरिका का यह नया प्रतिबंध बिल सिर्फ कागजी शेर बनकर रह जाएगा, जबकि भारत अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता के बल पर दुनिया भर के ऊर्जा बाजार पर अपना राज कायम रखेगा।




