खरीफ सीजन से पहले प्रशासन अलर्ट, किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के निर्देश

रायपुर। खरीफ सीजन को देखते हुए जिला प्रशासन ने खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी कक्ष में कृषि, राजस्व, सहकारिता विभाग और बीज निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर भंडारण, उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिले के सभी किसानों, विशेषकर लघु एवं सीमांत कृषकों को प्राथमिकता के आधार पर खाद और बीज उपलब्ध कराया जाए। कलेक्टर ने कहा कि खरीफ फसल की सफलता समय पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता पर निर्भर करती है, इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि सहकारी क्षेत्र में यूरिया उर्वरक का लगभग 52 प्रतिशत और डीएपी उर्वरक का 31 प्रतिशत भंडारण किया जा चुका है। आगामी मांग को देखते हुए अतिरिक्त भंडारण की प्रक्रिया भी जारी है। डीएपी की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए एनपीके उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक भी रखा गया है ताकि किसानों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।
कलेक्टर ने खाद विक्रय केंद्रों के नियमित निरीक्षण के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को उर्वरक निर्धारित सरकारी दर पर ही उपलब्ध कराया जाए। कालाबाजारी, कृत्रिम अभाव या किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बीज उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि बीज भंडारण का लगभग 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है, जबकि उपलब्ध बीजों का करीब 60 प्रतिशत किसानों को वितरित किया जा चुका है। खरीफ बुआई को ध्यान में रखते हुए शेष बीजों का वितरण भी तेजी से किया जा रहा है।
इसके अलावा एग्री स्टेक पंजीयन अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। ग्राम स्तर पर मुनादी कराकर अधिक से अधिक किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करने तथा पंचायतों, कृषि विस्तार अधिकारियों और ग्रामीण कर्मचारियों को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया।
जिला प्रशासन ने किसानों से अधिकृत केंद्रों से ही खाद-बीज खरीदने और किसी भी प्रकार की अनियमितता या अधिक मूल्य वसूली की शिकायत तत्काल प्रशासन या कृषि विभाग को देने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान खाद और बीज की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जाएगी तथा किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।




