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जशपुर में जनजातीय समाज से सीधा संवाद, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने शिकायतों के त्वरित निराकरण का दिया भरोसा

जशपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने गुरुवार को जशपुर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को विस्तार से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी वैध मामलों का नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

बैठक में विधायक गोमती साय, रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय तथा छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें न्याय दिलाना और उनके हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि आयोग का छत्तीसगढ़ दौरा जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग केवल शिकायतों की सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा भी करता है। जिन मामलों का समाधान जिला स्तर पर संभव नहीं होता, उन्हें संबंधित विभागों तक भेजकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाती है।

डॉ. लकड़ा ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनके बलिदान ने जनजातीय अधिकारों की रक्षा की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो या जनजातीय समाज के लोगों के साथ अन्याय, शोषण अथवा अत्याचार की घटनाएं सामने आएं, तो आयोग ऐसे मामलों में गंभीरता से हस्तक्षेप करता है।

उन्होंने बताया कि देश में करीब 12 करोड़ अनुसूचित जनजाति के नागरिक और 725 से अधिक जनजातीय समुदाय निवास करते हैं। इनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2004 में संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया, जो संवैधानिक संरक्षणों के क्रियान्वयन, शिकायतों की जांच और जनजातीय विकास योजनाओं की निगरानी करता है।

डॉ. लकड़ा ने यह भी जानकारी दी कि आयोग को जांच के दौरान दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त हैं। आयोग आवश्यक होने पर अधिकारियों को समन जारी कर सकता है, सार्वजनिक अभिलेख तलब कर सकता है और मामलों की विधिवत सुनवाई कर सकता है।

उन्होंने जनजातीय समुदाय से अपील की कि वे अपनी शिकायतें लिखित रूप में अथवा आयोग के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के माध्यम से दर्ज कराएं। ऑनलाइन आवेदन के बाद डायरी नंबर जारी किया जाता है, जिससे शिकायत की प्रगति पर निगरानी रखी जा सकती है। आवेदन करते समय सही पता, मोबाइल नंबर और पिनकोड दर्ज करने की भी सलाह दी गई।

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