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महायुद्ध के बीच चला भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’! जयशंकर ने खाड़ी में गाड़ा झंडा, दुनिया दंग- मोदी की कूटनीति के आगे झुका अमेरिका

दुनिया जब अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध से थर-थर कांप रही है, तब भारत ने अपनी कूटनीतिक धमक से यह साबित कर दिया है कि विश्व की बागडोर अब किसके हाथ में है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अपने छह देशों के बेहद महत्वपूर्ण दौरे के तहत खाड़ी देशों (कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान) का सफल दौरा संपन्न कर आज न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं, जहां वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत का डंका बजाने वाले हैं। पिछले 24 घंटों में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बेहद आक्रामक और संतुलित बयान जारी कर अमेरिका और ईरान दोनों को अपनी औकात याद दिलाई है। भारत ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा डालना भारत किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।

यह घटनाक्रम पूरी तरह से भारत के पक्ष में जाता दिख रहा है। एक तरफ जहां खाड़ी देश अमेरिकी और ईरानी मिसाइलों के डर से सहमे हुए हैं, वहीं वे भारत को इस संकट के एकमात्र समाधानकर्ता (Mediator) के रूप में देख रहे हैं। डॉ. जयशंकर की कूटनीति का असर यह हुआ है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान की नाकेबंदी के बावजूद भारत के रणनीतिक हितों, जैसे चाबहार बंदरगाह और खाड़ी में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को किसी भी पक्ष ने छूने की हिम्मत नहीं की है। संभावनाएं यह बन रही हैं कि इस युद्ध के बाद जब वैश्विक शक्ति संतुलन बदलेगा, तो भारत मध्य पूर्व में सबसे बड़े सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में उभरेगा।

अमेरिका भी समझ चुका है कि भारत को साथ लिए बिना वह हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में टिक नहीं सकता, इसलिए वाशिंगटन भी नई दिल्ली की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के आगे नतमस्तक नजर आ रहा है।

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