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रायपुर में मॉनसून सत्र का रण: पहले ही दिन विपक्ष का प्रचंड हल्लाबोल, साय सरकार के दावों की खुली पोल!

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बहुप्रतीक्षित मॉनसून सत्र 13 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जो नजारा देखने को मिला, उसने यह साफ कर दिया है कि अगले पांच दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए बेहद गर्म रहने वाले हैं। विष्णुदेव साय सरकार इस सत्र में करीब नौ अहम संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है, लेकिन विपक्ष (कांग्रेस) ने पहले ही दिन सरकार की घेराबंदी करके उसके पसीने छुड़ा दिए। कानून-व्यवस्था, वादों से मुकरती सरकार और किसानों की समस्याओं को लेकर विपक्ष ने सदन के भीतर ऐसा आक्रामक रुख अपनाया कि सत्तापक्ष के मंत्रियों के पास जवाब देने के लिए शब्द कम पड़ गए।

सत्र के पहले ही दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ, नारेबाज़ी हुई और गर्भगृह तक में विपक्षी विधायकों ने पहुंचकर सरकार को जनविरोधी करार दिया। विपक्ष का सीधा आरोप है कि साय सरकार केवल घोषणाओं और विज्ञापनों में चल रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। 5 दिनों के इस छोटे से सत्र में कुल 5 बैठकें होनी हैं, लेकिन पहले ही दिन की तल्खी देखकर लगता नहीं कि जनहित के मुद्दों पर कोई शांत चर्चा हो पाएगी।

सत्तापक्ष जहां अपनी पीठ थपथपाने में लगा है कि वे वित्तीय मामलों और संशोधनों पर चर्चा के लिए तैयार हैं, वहीं विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह सरकार को इतनी आसानी से वॉकओवर नहीं देने वाला। छत्तीसगढ़ की जनता यह तमाशा देख रही है कि कैसे जनहित के नाम पर बुलाई गई विधानसभा केवल राजनीतिक अखाड़ा बनकर रह गई है। साय सरकार के लिए यह सत्र किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि अगर वे विपक्ष के तीखे सवालों का तार्किक जवाब नहीं दे पाए, तो 2026 का यह मॉनसून सत्र उनके लिए राजनीतिक रूप से बेहद भारी पड़ने वाला है।

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