दिल्ली में एक्सपायरी डेट का जानलेवा खेल: जनता की थाली में परोसा जा रहा था ‘धीमा जहर’, सोती रही सरकार!

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की धज्जियां उड़ गई हैं। 13 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त छापेमारी ने एक ऐसे घिनौने रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसे सुनकर किसी भी आम इंसान की रूह कांप जाए। दिल्ली के गोदामों में एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) हो चुके खाद्य पदार्थों पर नई मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट के फर्जी स्टिकर लगाकर उन्हें खुले बाजार में धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। यह सीधे तौर पर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ और सामूहिक हत्याकांड की साजिश है।
हैरानी की बात यह है कि यह धंधा कोई एक-दो दिन से नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रहा था। सवाल यह उठता है कि जब इस देश का आम नागरिक हर पैकेट पर भारी टैक्स चुकाता है, तो उसे बदले में खाने की जगह ‘धीमा जहर’ क्यों परोसा जा रहा है? फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (FSSAI) के आला अधिकारी एसी कमरों में बैठकर कौन सी फाइलों पर दस्तखत कर रहे थे कि उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा नेक्सस फल-फूल रहा था? छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सड़े हुए बच्चों के दूध के पाउडर, फफूंद लगी चॉकलेट्स और नकली ब्रांडेड मसाले बरामद किए गए हैं।
इस गिरोह के तार केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका है। पुलिस ने मामले में मुख्य सरगना सहित पांच लोगों को दबोचा है, लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जब तक इस पूरे सिस्टम में बैठे उन ‘सफेदपोशों’ पर गाज नहीं गिरेगी जो चंद रुपयों के कमीशन के लिए देश के बच्चों और नागरिकों की सेहत का सौदा कर रहे हैं, तब तक ऐसी कार्रवाई महक एक दिखावा बनकर रह जाएगी। देश की जनता अब जाग चुकी है और उसे झूठे आश्वासनों की नहीं, बल्कि इन आदमखोरों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने वाले सख्त एक्शन की जरूरत है।



