200 करोड़ की ‘धमाल’ के पीछे छुपा रीमेक और कचरा कंटेंट का सच, बी-टाउन के नखरों पर दर्शकों का करारा थप्पड़!

बॉलीवुड का दोगलापन और गिरता हुआ रचनात्मक स्तर आज फिर सुर्खियों में है। ‘धमाल 4’ जैसी मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर 190-200 करोड़ का आंकड़ा छूना भले ही निर्माताओं के लिए ढोल पीटने का जरिया हो, लेकिन सिनेमा प्रेमियों के लिए यह घटिया चुटकुलों और घिसे-पिटे फॉर्मूलों का एक और भयानक डोज़ साबित हुआ है। आज का दर्शक जब हॉलीवुड की ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ या क्रिस्टोफर नोलन की भव्य फिल्मों के स्तर से भारतीय फिल्मों की तुलना करता है, तो बॉलीवुड की लाचारी साफ नजर आती है। लाखों-करोड़ों फीस ऐंठने वाले बड़े स्टार्स सिर्फ रीमेक और बेतुकी स्क्रिप्ट्स पर काम कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, गॉसिप और सोशल मीडिया ड्रामे में डूबी बी-टाउन की बिरादरी का असली चेहरा लगातार सामने आ रहा है। पुराने राइटर्स और गानों के रीमिक्स के नाम पर रॉयल्टी चुराने वाली यह इंडस्ट्री जब भी आलोचना का शिकार होती है, तो स्टार्स विक्टिम कार्ड खेलने लगते हैं। हाल ही में मनोज मुंतशिर द्वारा ‘आदिपुरुष’ विवाद पर दिए गए पछतावे के बयान या आमिर खान की निजी जिंदगी पर हिना खान के तीखे कमेंट्स यह साबित करते हैं कि बॉलीवुड के पास अब अपनी फिल्मों के जरिए बात करने के लिए कंटेंट बचा ही नहीं है—सारा ध्यान सिर्फ कंट्रोवर्सी और पीआर स्टंट्स पर टिका है।
अजय देवगन, अरशद वारसी और रितेश देशमुख जैसे बड़े नामों से सजी फिल्में अगर सिर्फ दशकों पुराने चुटकुलों को नए लिफाफे में बेचेंगी, तो ओटीटी के जमाने में दर्शक कब तक इस घटिया कंटेंट को बर्दाश्त करेंगे? ‘अल्फा’ जैसी महिला-केंद्रित एक्शन फिल्मों में भी स्टार्स का घमंड और बेतुका डायरेक्शन साफ झलकता है। जब तक ये चमक-दमक वाले स्टार्स अपनी वैनिटी वैन से बाहर निकलकर असल कहानियों पर काम नहीं करेंगे, तब तक बायकॉट का डर और बॉक्स ऑफिस पर नाकामी की तलवार इन पर लटकती रहेगी।


