UPI लेन-देन पर 0.4% टैक्स की मार: डिजिटल इंडिया का ढोल पीटने वाली सरकार ने वसूला तुगलकी फरमान, सुप्रीम कोर्ट पहुंची जंग!

डिजिटल क्रांति और कैशलेस इकोनॉमी का रोज-रोज राग अलापने वाली व्यवस्था ने आम व्यापारी और जनता की जेब पर सीधे डाका डालना शुरू कर दिया है। 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतानों पर 0.4% चार्ज थपने के फैसले ने पूरे देश के बाजार में आग लगा दी है। सरकार का यह तुगलकी फरमान देश के छोटे-बड़े व्यापारियों के पेट पर लात मारने जैसा है।
इस बर्बर फैसले के खिलाफ अब मामला सुप्रीम कोर्ट के गलियारों तक पहुंच चुका है। सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर कर इस जनविरोधी टैक्स को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई गई है। विपक्ष लगातार सवाल दाग रहा है कि जब आम जनता को डिजिटल लेन-देन का आदी बना दिया गया, तब उन पर यह छिपा हुआ टैक्स क्यों थोपा जा रहा है? डिजिटल इंडिया का सपना दिखाने वाली हुकूमत का यह लालची चेहरा बेनकाब हो चुका है और सड़क से लेकर अदालत तक इस तानाशाही के खिलाफ जंग छिड़ गई है।
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