IMEC प्रोजेक्ट पर अमेरिकी मुहर, भारत के सामने घुटने टेकने को मजबूर दुनिया!

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत के महत्त्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर) को खुला समर्थन देना इस बात का पुख्ता सबूत है कि वैश्विक व्यापार में भारत के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। मध्य पूर्व में छिड़ी जंग और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों के बीच अमेरिका का यह मानना कि अब व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित करने के लिए भारत के इस कॉरिडोर की ही जरूरत है, भारतीय कूटनीति की बहुत बड़ी जीत है।
मिडिल ईस्ट संकट के कारण रणनीतिक समुद्री मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) पर जो अनिश्चितता छाई है, उसने पश्चिमी देशों की सांसें अटका दी हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन का साफ-साफ कहना कि ऊर्जा और व्यापार के लिए ईरान के नियंत्रण वाले चौकपॉइंट्स पर निर्भरता खत्म करनी होगी और IMEC कॉरिडोर को रफ्तार देनी होगी, यह साबित करता है कि भारत ही वैश्विक अर्थव्यवस्था का असली संकटमोचक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल अब पश्चिमी जगत की सबसे बड़ी मजबूरी और जरूरत दोनों बन चुकी है।
भारत ने अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और मजबूत अर्थव्यवस्था के दम पर दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि एशिया से यूरोप तक व्यापार की रीढ़ केवल और केवल भारत ही हो सकता है। पश्चिमी शक्तियों को अब अच्छी तरह समझ आ गया है कि भारत को नजरअंदाज करके वैश्विक शांति या व्यापार की कल्पना करना खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। भारत का यह आर्थिक दबदबा आने वाले दशकों तक वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा।




