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दंतेवाड़ा के जंगलों से निकले सपनों को मिली उड़ान, जावंगा एजुकेशन सिटी ने बदली आदिवासी बच्चों की जिंदगी

दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले का जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। कभी दूरस्थ गांवों में रहने वाले बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और बेहतर अवसरों की चुनौती थी, लेकिन जावंगा की इस पहल ने कई बच्चों को आगे बढ़ने का मंच दिया है। यहां पढ़ने वाली बेटियां NEET-UG में सफलता हासिल कर चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने की राह पर हैं, वहीं युवा डिजिटल कौशल हासिल कर बड़ी कंपनियों में रोजगार पा रहे हैं।

करीब 150 एकड़ में फैले इस परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं संचालित हो रही हैं। यहां कुल 7,436 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं हैं। करीब 5,370 विद्यार्थी परिसर के छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के गांवों और जंगलों से आने वाले बच्चों को आवास, भोजन, शिक्षा और मार्गदर्शन की सुविधा एक ही परिसर में मिलती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे स्कूल ड्रॉप-आउट दर 50 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत तक पहुंची है।

बेटियों ने रचा सफलता का नया अध्याय

‘छू लो आसमान’ कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस साल NEET-UG में सफलता हासिल की है। इन विद्यार्थियों को शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिला है। ऐसे परिणाम दूरस्थ ग्रामीण परिवारों के लिए शिक्षा के बढ़ते अवसरों को दर्शाते हैं।

डिजिटल शिक्षा से रोजगार तक

जावंगा का नवगुरुकुल युवाओं को डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दे रहा है। यहां से प्रशिक्षित करीब 100 युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार मिला है। एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में डेटा एनालिटिक्स पद के लिए भी हुआ है। वहीं आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले करीब 95 प्रतिशत विद्यार्थी जनजातीय समुदाय से हैं।

खेलों में भी दिख रही प्रतिभा

एजुकेशन सिटी के ‘एकलव्य खेल परिसर’ में स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ‘खेलो इंडिया’ से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। शिक्षा के साथ खेल गतिविधियां बच्चों में अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने का माध्यम बन रही हैं।

जरूरतमंद बच्चों को मिला सुरक्षित भविष्य

दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे क्षेत्रों के अनाथ और हिंसा प्रभावित बच्चों के लिए आस्था विद्या मंदिर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां बच्चों को उनकी परिस्थितियों और जरूरत के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। शिक्षा के साथ उन्हें आवास, खेल, संगीत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।

जावंगा एजुकेशन सिटी की पहल को विभिन्न स्तरों पर पहचान मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, KPMG ने इसे दुनिया की 100 नवोन्मेषी परियोजनाओं में शामिल किया था। दंतेवाड़ा प्रशासन को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मई 2015 को जावंगा एजुकेशन सिटी का दौरा कर विद्यार्थियों से संवाद किया था।

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