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गांजे के ‘काले कारोबार’ से खड़ा किया बेनामी साम्राज्य: बर्खास्त GRP जवान संतोष राठौर पर ACB का शिकंजा, 16 लाख की अकूत संपत्ति पर चार्जशीट दाखिल

खाकी के नाम पर कलंक बने बर्खास्त GRP कॉन्स्टेबल संतोष राठौर का काला चिट्ठा अब अदालत के सामने आ चुका है। गांजा तस्करों को पकड़ने की जिस वर्दी में जिम्मेदारी मिली थी, उसी का फायदा उठाकर तस्करों से सांठगांठ की, जब्ती का गांजा बाजार में बेचा और जमकर बेनामी संपत्ति बनाई। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच पूरी कर विशेष न्यायालय (PC Act) में 16.19 लाख रुपए की ‘आय से अधिक संपत्ति’ मामले में चार्जशीट पेश कर दी है।

अफसरों की ‘छूट’ और तस्करी का खेल मामला बिलासपुर GRP का है, जहां संतोष राठौर अपने तीन साथी आरक्षकों—मन्नू प्रजापति, सौरभ नागवंशी और लक्ष्मण गाइन के साथ एंटी क्राइम यूनिट में तैनात था। अधिकारियों से इन्हें रायगढ़ से राजनांदगांव तक खुली छूट मिली हुई थी। लेकिन रक्षक ही भक्षक बन बैठे; ट्रेनों में गांजा तस्करों को पकड़ने के बाद उन पर कार्रवाई करने के बजाय जब्त माल खुद हड़प लेते और मोटी रकम ऐंठकर छोड़ देते।

कमाई 46 लाख, जायदाद 62 लाख से पार ACB की जांच में सामने आया कि सेवा के दौरान संतोष राठौर की वैध आय 46,08,341 रुपए थी, लेकिन उसके पास से 62,28,137 रुपए की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा मिला। गांजे की काली कमाई से बने इस साम्राज्य में लग्जरी मकान, गाड़ियां और रिश्तेदारों के नाम पर ली गई संपत्तियां शामिल हैं।

जेल की सलाखों के पीछे पूरी चौकड़ी इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद 19 नवंबर 2024 को रेल एसपी ने संतोष राठौर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद ACB ने दिसंबर 2024 में उसके ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। NDPS एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज होने के बाद से संतोष राठौर समेत चारों आरोपी आरक्षक फिलहाल बिलासपुर जेल में बंद हैं, जहां अब कानून का शिकंजा उन पर पूरी तरह कस चुका है।

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