कोलकाता के प्रसिद्ध चोरबाग़ान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भारी बारिश और अफवाह के चलते मची भगदड़ में अब तक 19 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद से ही पूरे शहर में हाहाकार मचा हुआ है और जनता का गुस्सा उफान पर है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पंडाल में क्षमता से दस गुना अधिक भीड़ जमा थी, लेकिन न तो निकास के पर्याप्त रास्ते थे और न ही पुलिस की कोई ठोस व्यवस्था। इस गंभीर लापरवाही के आरोप में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आयोजकों समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया गया है। विपक्षी दलों ने इस भीषण हादसे के लिए सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। हर तरफ केवल एक ही सवाल गूंज रहा है—आखिर श्रद्धालुओं की जान की इतनी सस्ती कीमत क्यों बनाई गई? हर साल सुरक्षा के लंबे-चौड़े दावे ठोकने वाला प्रशासन इस बार भी खामोश बैठा रहा और बेकसूर लोग अपनी जान गंवा बैठे।
तस्वीरें साफ बयां कर रही हैं कि इस भयानक हादसे के पीछे सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से प्रशासनिक नाकामी और भ्रष्टाचार का गठजोड़ जिम्मेदार है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
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