धमतरी। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को उनकी जमीन और मकान का कानूनी दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की स्वामित्व योजना का धमतरी जिले में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के जरिए ग्रामीण आबादी भूमि पर निवासरत परिवारों को उनकी संपत्ति का अधिकार अभिलेख सौंपा जा रहा है। इस मामले में धमतरी जिला प्रदेश में अग्रणी बना हुआ है। जिले में अब तक 50 हजार से अधिक पात्र परिवारों को स्वामित्व संबंधी दस्तावेज वितरित किए जा चुके हैं।
इसी माह सेवा संकल्प अभियान के तहत अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा ने 40 हितग्राहियों को स्वामित्व प्रमाण पत्र (पॉसेशन सर्टिफिकेट) प्रदान किए।
501 गांवों में ड्रोन से हुआ सर्वेक्षण
स्वामित्व योजना के तहत धमतरी जिले के 501 राजस्व ग्रामों में सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के माध्यम से ड्रोन सर्वेक्षण कराया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी भूमि का सटीक नक्शा तैयार करना और वहां निवासरत परिवारों के मकान एवं भूखंडों की पहचान करना है। ड्रोन से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पात्र परिवारों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं।
कई चरणों में तैयार हो रहे संपत्ति के दस्तावेज
योजना के तहत सबसे पहले राजस्व विभाग के मैदानी अमले द्वारा पटवारी और राजस्व निरीक्षकों के माध्यम से आबादी भूमि की सीमाएं निर्धारित की जाती हैं। इसके बाद राजस्व एवं पंचायत विभाग के समन्वय से मकानों, भूखंडों और सरकारी संपत्तियों का भौतिक सत्यापन किया जाता है।
सर्वे ऑफ इंडिया से मिले नक्शों का स्थल पर मिलान कर प्रारंभिक अभिलेख तैयार किए जाते हैं। इसके बाद ग्राम पंचायतों में अभिलेखों का प्रथम प्रकाशन किया जाता है। इस दौरान मिलने वाली दावा-आपत्तियों का ई-कोर्ट के माध्यम से निराकरण किया जाता है। आवश्यक संशोधनों के बाद अंतिम प्रकाशन कर अभिलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं और पात्र परिवारों को उनके अधिकार संबंधी दस्तावेज वितरित किए जाते हैं।
63,826 अधिकार अभिलेख तैयार, वितरण जारी
धमतरी जिले के सभी 501 ग्रामों में प्रथम प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं 390 से अधिक गांवों में अंतिम प्रकाशन भी पूरा कर लिया गया है। योजना के तहत जिले में 78,416 अधिकार अभिलेख तैयार कर वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके मुकाबले अब तक 63,826 अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 47 हजार से अधिक दस्तावेज पात्र हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं।
शेष गांवों में अभिलेख निर्माण और अन्य प्रक्रियाओं को नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जमीन-मकान के विवाद होंगे कम, बैंकिंग सुविधाओं का भी मिलेगा लाभ
स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक मजबूती का नया रास्ता खोल सकती है। संपत्ति का दस्तावेजी प्रमाण मिलने से जमीन और मकान पर अधिकारों को लेकर स्पष्टता आएगी और विवादों की आशंका कम होगी। इसके अलावा पात्रता और संबंधित नियमों के अधीन ये दस्तावेज बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं, संपत्ति के लेन-देन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
भूमि अभिलेखों के डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति प्रबंधन की व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।
कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में अभिलेखों की शुद्धता, पारदर्शिता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को शेष गांवों में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने और अधिकार अभिलेखों के निर्माण एवं वितरण में किसी भी तरह की त्रुटि नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं।
धमतरी जिले में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण, मैदानी सत्यापन और डिजिटल अभिलेख प्रबंधन के जरिए ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का दस्तावेजी अधिकार दिलाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले समय में यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शी भूमि प्रबंधन और आर्थिक सशक्तीकरण को नई मजबूती दे सकती है।
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