छत्तीसगढ़ में 42 लाख वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के दौड़ रहे! डेढ़ साल में भी लक्ष्य पूरा नहीं, परिवहन विभाग पर उठे सवाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दौड़ रहे लाखों पुराने वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने की व्यवस्था डेढ़ साल बाद भी अपने लक्ष्य से काफी पीछे है। प्रदेश में करीब 42 लाख पुराने वाहनों पर अब तक हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लग पाई है। इस स्थिति ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और अभियान की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदेश में एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत कुल 52.48 लाख वाहनों में से केवल 10.72 लाख वाहनों पर ही हाई सिक्योरिटी प्लेट लग पाई है। यानी लगभग 79.56 प्रतिशत वाहन अभी भी इस सुरक्षा व्यवस्था से बाहर हैं।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का उद्देश्य केवल वाहन की पहचान करना नहीं है। इसके जरिए नंबर प्लेट की नकल और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलती है। वाहन चोरी जैसे अपराधों की जांच में भी सही पंजीकरण विवरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रायपुर जिले की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 13.34 लाख पुराने वाहनों में से केवल 3.06 लाख वाहनों पर ही हाई सिक्योरिटी प्लेट लगाई जा सकी है। वहीं 10.28 लाख वाहन अभी भी इस प्लेट का इंतजार कर रहे हैं। राजधानी में अभियान की कवरेज केवल 23.53 प्रतिशत बताई गई है।

सवाल यह है कि जब इस व्यवस्था को लागू हुए इतना समय बीत चुका है, तब भी इतने बड़े वाहन वर्ग तक सुविधा क्यों नहीं पहुंच सकी? क्या अधिकृत कंपनियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं या फिर आवेदन और प्लेट लगाने की प्रक्रिया में कोई व्यावहारिक परेशानी है? इन सवालों का जवाब परिवहन विभाग को देना होगा।

रिपोर्ट में दो अधिकृत कंपनियों को प्लेट लगाने की जिम्मेदारी दिए जाने का उल्लेख है। इनमें रियल मेजान इंडिया लिमिटेड ने 23.53 प्रतिशत और रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड ने 17.35 प्रतिशत वाहनों पर प्लेट लगाई है। दिसंबर 2024 में व्यवस्था लागू होने के बाद अभियान को एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी लाखों वाहन बिना प्लेट के हैं।

वाहन के प्रकार के हिसाब से निर्धारित शुल्क भी तय है। दोपहिया वाहनों के लिए 365.80 रुपये, तीनपहिया वाहनों के लिए 427.16 रुपये और कार तथा हल्के मोटर वाहनों के लिए 656.08 रुपये शुल्क बताया गया है।

परिवहन विभाग के अपर आयुक्त डी. रविशंकर के अनुसार, अधिकृत कंपनियों को पात्र वाहनों पर प्लेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने अभियान तेज करने और जांच अभियान चलाकर कार्रवाई करने की बात भी कही है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि जब लाखों वाहन अभी तक प्लेट से वंचित हैं, तब कार्रवाई से पहले आम वाहन मालिकों को पर्याप्त सुविधा और जागरूकता उपलब्ध कराना कितना जरूरी है? यदि आवेदन प्रक्रिया आसान और उपलब्धता पर्याप्त नहीं होगी तो अभियान को निर्धारित समय में पूरा करना मुश्किल बना रहेगा।

वाहन मालिकों को भी अधिकृत प्रक्रिया के जरिए प्लेट लगवानी चाहिए और अनधिकृत एजेंटों या फर्जी वेबसाइटों से बचना चाहिए। नंबर प्लेट की बुकिंग और भुगतान से पहले आधिकारिक जानकारी की जांच करना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ में 42 लाख वाहनों पर HSRP नहीं लग पाना परिवहन व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है। अब विभाग ने जांच और कार्रवाई की बात कही है, लेकिन असली परीक्षा इस बात की होगी कि लाखों वाहन मालिकों तक यह सुविधा कितनी तेजी से पहुंचती है। सुरक्षा के नाम पर शुरू हुआ अभियान आंकड़ों में कब सफल होगा, यह देखना बाकी है।

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