चीन ने रूस का तेल दबोचा, भारत की सप्लाई पर संकट! ड्रैगन की खरीदारी से बढ़ी नई दिल्ली की मुश्किल

चीन की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स की 20 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े प्रवाह में व्यवधान के बीच चीन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। चीन की समुद्री रूसी कच्चे तेल की खरीद अगस्त में करीब 12.5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ईरानी कच्चे तेल की कम उपलब्धता की भरपाई के लिए रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा है। इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि भारत भी रूसी बंदरगाहों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। अगस्त में भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 18.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि जून और जुलाई में यह आंकड़ा 27 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक था।
रूसी तेल भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। रॉयटर्स के अनुसार जुलाई में भारत के कुल तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
अब चीन की बढ़ती खरीद भारत के लिए चुनौती बन रही है। एशियाई बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने से भारत की रिफाइनिंग क्षमता और भविष्य के ईंधन उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। भारत अभी भी अपने ईंधन निर्यात को मजबूत बनाए हुए है, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति में आगे और कमी क्षेत्रीय ईंधन बाजार के लिए चुनौती बन सकती है।
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