छत्तीसगढ़

मिर्च की खेती कर किसान अर्जित कर रहे हैं आय

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में मुख्यतः विकासखण्ड कुसमी एवं शंकरगढ़ में मिर्च की खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रहा है, मिर्च की बढ़ती कीमत और पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छी पैदावार के चलते यहां के किसानों को लगातार मुनाफा प्राप्त हो रहा है, इसके कारण किसान पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक से अधिक मिर्च की खेती करना पसंद कर रहे हैं।
किसान मिर्च की नर्सरी करने हेतु बीज की बोवाई नवम्बर-दिसम्बर में करते हैं एवं थरहा तैयार हो जाने पर मुख्य खेत में पौध की रोपाई फरवरी-मार्च महिने में करते हैं। वैसे तो इस क्षेत्र में किसान मिर्च की कई किस्मों को लगाना पसंद करते है, उनमें मुख्यतः वीएनआर, जेके, नामधारी, नानगो, टोकिता प्रमुख प्रचलित किस्म है, यह सभी किस्मे अपनी विशिष्टता के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक लोकप्रिय है। मुख्यतः विएनआर किस्म अधिक उपज देता है, साथ ही अधिक बारिश होने की स्थिति में बारिश प्रतिरोधी है, फल लम्बा, मोटा, गहरा व हरा होता है। किस्म नानगो अपने तिखापन हेतु प्रसिद्ध है, सभी मिर्ची की किस्मे लगभग 3-4 फीट ऊंचाई का होता, जो कि उपभोक्ता के मानको के अनुकूल है। अच्छी जलवायु व अनुकूल वातावरण के कारण इन पहाड़ी क्षेत्रों में मिर्च का बम्फर पैदावार होता है, जिससे किसान खुश होकर हर वर्ष मिर्च की खेती करते हैं एवं इन क्षेत्रों के अन्य किसानों को भी मिर्च की खेती हेतु प्रेरित कर रहे है। मिर्च से मुख्यतः 3-4 बार तक तोड़ाई होता है, पहला तोड़ाई जून महिने से शुरू होता है और मिर्च की तोड़ाई शिखर बिन्दु जुलाई एवं अगस्त तक का महिना है जिसमें अधिकांश मिर्च की तोड़ाई होती है, यदि मौसम अनुकूल रहा तो तोड़ाई सितम्बर तक होती चली जाती है, जो कि मिर्च के किस्म और जलवायु पर निर्भर है। मिर्च का विक्रय किसानों के खेतों से ही शुरू हो जाता है और अन्य राज्यों से व्यापारी गाड़ियां लेकर आते हैं, प्रतिदिन लगभग 40-50 पिकअप किसनों के खेतों में आती है और मिर्च से लदी कई गाड़िया उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखण्ड एवं अन्य राज्य के कई शहरों में विक्रय हेतु जाती है। इस प्रकार कुसमी और शंकरगढ़ के मिर्च के स्वाद का आनंद अन्य राज्यों के उपभोक्ता भी करते हैं। पहाड़ी क्षेत्र में मिर्च का उत्पादन प्रति एकड़ 20-25 क्विंटल होता है और थोक बाजार पर 20 से 40 रूपये प्रति किलो की दर से बिकता है और मिर्च की अधिक मांग पर यह दर 45 रूपये प्रति किलो तक जाता है। इस प्रकार अनुमान प्रति एकड़ 75 हजार से 85 हजार तक किसान को अर्जित होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में मिर्च उत्पादन हेतु कुल 1600-1800 हेक्टेयर रकबा है, जिसमें लगभग 800-100 किसान खेती हेतु संलग्न है, आने वाले समयों में यह रकबा और बढ़ेगा किसान भी खेती हेतु जुड़ेंगे, जिससे जिला बलरामपुर मिर्च की खेती हेतु पूरे प्रदेश एवं राज्य में समृद्ध बनेगा।
हमारे जिले बलरामपुर-रामानुजगंज में मिर्च का बम्फर उत्पादन हो रहा है, इससे जिले के लगभग 800-1000 किसन के आसपास मिर्च की खेती से जुड़े है, इससे उद्यानिकी विभाग की और राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजनांगर्त मशाला क्षेत्र विस्तार, मल्चिंग शिट, ड्रिप, जैसे विभिन्न योजनाओं के साथ जोड़ा जा रहा है तथा समय-समय पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे यहां मिर्च उत्पादन कृषकों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि आयेगी।

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