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नक्सल छाया से विकास की राह पर साहेबिनकछार, जनसमस्या शिविर ने बदली तस्वीर

रायपुर। गरियाबंद जिले के घने जंगलों के बीच स्थित पूर्व नक्सल प्रभावित गांव साहेबिनकछार अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। कभी भय, अभाव और उपेक्षा का सामना करने वाला यह गांव अब धीरे-धीरे विकास की रोशनी की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

करीब 70 वर्षीय गिरधर सोरी, जो वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे, उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब गांव में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित हुआ। इस शिविर में उन्हें व्हीलचेयर मिली, जो उनके लिए सिर्फ एक साधन नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत बन गई। अब उनके चेहरे पर संतोष और उम्मीद साफ झलकती है।

नक्सल प्रभाव समाप्त होने के बाद पहली बार आयोजित इस शिविर में कलेक्टर बीएस उईके, पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर और जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं, जिनका मौके पर ही समाधान किया गया।

हालांकि साहेबिनकछार अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। गांव में न पक्की सड़क है और न ही नियमित बिजली—सौर ऊर्जा के भरोसे जीवन चल रहा है। इसके बावजूद प्रशासन पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, आवास और राशन जैसी सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

इसी शिविर में 65 वर्षीय जुगसाय गोड को चलने में सहारा देने के लिए छड़ी भी प्रदान की गई, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया।

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