भारत का अमेरिका को करारा थप्पड़! आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं, विदेश मंत्रालय ने वॉशिंगटन को दिखाया उसका असली चेहरा

अपनी संप्रभुता और स्वाभिमान से कोई समझौता न करने वाले नए भारत ने अमेरिका को उसकी औकात याद दिला दी है। भारत के प्रस्तावित विदेश अंशदान विनियमन संशोधन (FCRA) विधेयक पर अमेरिकी सांसदों द्वारा की गई अनर्गल और गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी का भारत सरकार ने अत्यंत सख्त और आक्रामक लहजे में करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका को दोटूक शब्दों में चेताया कि भारत के विधायी मामले और संसद के फैसले पूरी तरह से भारत का आंतरिक विषय हैं, जिसमें किसी भी बाहरी देश की टांग अड़ाने की हरकत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की पाखंडी नीति का पर्दाफाश करते हुए आईना दिखाया कि खुद अमेरिका समेत दुनिया के दर्जनों देश विदेशी फंडिंग और विदेशी पैसों के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कड़े से कड़े कानून बनाते हैं। ऐसे में जब भारत अपने देश की सुरक्षा, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एफसीआरए (FCRA) कानून को मजबूत कर रहा है, तो अमेरिका को मिर्ची क्यों लग रही है? भारत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी विदेशी ताकत को भारत के घरेलू मामलों में उपदेश देने का कोई हक नहीं है।
भारत के इस आक्रामक रुख ने वॉशिंगटन के गलियारों में सन्नाटा पसार दिया है। दुनिया ने देख लिया है कि आज का भारत किसी भी वैश्विक महाशक्ति के सामने दबने वाला नहीं है। विदेश मंत्रालय का यह तीखा और दोटूक बयान दर्शाता है कि भारत अपने फैसलों के लिए केवल अपनी जनता और संसद के प्रति जवाबदेह है, न कि किसी अमेरिकी लॉबी या सांसद के तुगलकी बयानों के प्रति। भारत के इस कड़े प्रहार ने अमेरिकी दखलअंदाजी की आड़ में रची जा रही साजिशों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।



