संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष दूत की एक रिपोर्ट ने भारत के राजनयिक हलकों में भूचाल ला दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में युवाओं और छात्रों के लोकतांत्रिक स्पेस को लगातार कम किया जा रहा है और विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी तंत्र की तरफ से दमनकारी रवैया अपनाया जा रहा है।
भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए संयुक्त राष्ट्र में करारा और तीखा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा—”तथ्यों की जांच करें, भारत को बदनाम करने से पहले सोचें” (Verify Before She Vilifies)। भारत ने सवाल उठाया कि संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाएं बिना जमीनी हकीकत जाने ऐसे पूर्वाग्रह से ग्रसित और एकतरफा एजेंडे कैसे चला सकती हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि देश का हर युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पूरी तरह से भागीदार है और चुनिंदा भ्रामक रिपोर्टों के आधार पर देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को दागदार करने का अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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