सच से डर गया पाकिस्तान! विदेशी मीडिया और पत्रकारों पर लगाया अब तक का सबसे सख्त पहरा

पाकिस्तान सरकार ने विदेशी मीडिया और स्थानीय पत्रकारों पर नकेल कसते हुए नए कड़े नियम लागू किए हैं। कश्मीर और आंतरिक अशांति से जुड़ी खबरों को दबाने के लिए यह सेंसरशिप लगाई गई है।
अपने आंतरिक मामलों और चरमराती व्यवस्था की पोल दुनिया के सामने खुलने से डर रही पाकिस्तानी हुकूमत ने अब मीडिया की आवाज का गला घोंटना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान सरकार ने ‘फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026’ (Foreign Media Facilitation Guidelines 2026) के नाम पर एक नया और बेहद दमनकारी फरमान जारी किया है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्थानीय पत्रकारों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।
इस नए छह-पृष्ठ के ड्रैकोनियन कानून के मुताबिक, अब किसी भी विदेशी मीडिया संस्थान या उसके कर्मचारियों को अपनी रिपोर्टिंग के लिए सीधे तौर पर सूचना मंत्रालय की एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। साथ ही, इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के अलावा देश के अन्य हिस्सों (विशेषकर PoJK और संवेदनशील इलाकों) में जाकर रिपोर्टिंग करने से पहले सरकार से अनुमति (NOC) लेनी अनिवार्य कर दी गई है।
सच छिपाने की घिनौनी साजिश: पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन, PoJK के विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक बदहाली की खबरों को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए यह सेंसरशिप लगाई गई है।
प्रेस संगठनों का तीखा विरोध: पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ पत्रकारों (PFUJ) और ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (CPJ) ने इन नियमों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है।
मनमाने ढंग से लाइसेंस रद्द: नए नियमों के तहत यदि कोई पत्रकार पाकिस्तान की ‘वैचारिक या सुरक्षा संप्रभुता’ के खिलाफ रिपोर्टिंग करता है, तो उसका प्रेस कार्ड तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।
जिस देश में लोकतंत्र और संविधान कागजों तक सीमित हो, वहां मीडिया को दबाकर तानाशाही चलाना ही एकमात्र विकल्प बचता है। पाकिस्तान सरकार की यह बौखलाहट साफ दिखाती है कि वह अंदर से कितनी कमजोर हो चुकी है।
संभावित असर: इन पाबंदियों से वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की छवि एक ‘पुलिस स्टेट’ और तानाशाही देश के रूप में और अधिक पुख्ता होगी। मीडिया पर इस कड़े पहरे से वहां के जमीनी हालात और अधिक तेजी से बाहर आएंगे।



