रतन टाटा के सपनों की बलि! टाटा संस बोर्ड में महासंग्राम, नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट को बताया अवैध

देश का सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद कॉर्पोरेट घराना टाटा ग्रुप अब अंदरूनी वर्चस्व की ऐसी भयानक जंग में उलझ गया है, जिसने पूरे भारतीय बाजार को हिलाकर रख दिया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के 5 साल के सेवा विस्तार (री-अपॉइंटमेंट) और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर टाटा संस बोर्ड और बहुसंख्यक शेयरधारक ‘टाटा ट्रस्ट्स’ आमने-सामने आ गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख सदस्यों और नोएल टाटा ने इस पूरी नियुक्ति को ही ‘अवैध’ घोषित कर दिया है।
बोर्ड रूम की यह लड़ाई उस वक्त सबसे ज्यादा भड़क गई जब नोएल टाटा ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि होल्डिंग कंपनी को सार्वजनिक रूप से लिस्ट करने की कोशिश टाटा ग्रुप के मूल चरित्र और उसके ऐतिहासिक मूल्यों को पूरी तरह तबाह कर देगी। आरबीआई के कड़े नियमों और टाटा संस के बोर्ड की हठधर्मिता के बीच टाटा ट्रस्ट्स का यह सख्त रुख यह दर्शाता है कि अंदर ही अंदर पावर गेम कितना गंदा हो चुका है। निवेशकों के बीच इस जंग से हड़कंप मचा हुआ है और शेयर बाजार में टाटा ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
जो घराना अपनी नैतिकता और उसूलों के लिए जाना जाता था, आज वही घराना निजी महत्वाकांक्षाओं और कॉर्पोरेट कब्जे की लड़ाई का अड्डा बन गया है। अगर संस्थापकों के मूल्यों को दरकिनार कर मनमाने फैसले लिए जाएंगे, तो टाटा साम्राज्य का यह बिखराव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।




