अबूझमाड़ में शिक्षा की पहली किरण: आजादी के बाद कारकाबेड़ा में खुला पहला स्कूल

रायपुर। देश के गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन के चलते छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद के लिए कुख्यात रहे इस इलाके में अब शिक्षा की नई रोशनी पहुंच रही है। इसका ऐतिहासिक उदाहरण नारायणपुर जिले के सुदूर ग्राम कारकाबेड़ा में देखने को मिला, जहां आजादी के बाद पहली बार स्कूल की स्थापना की गई है।
हाल ही में कोड़ेनार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों ने गांव में स्कूल खोलने की मांग रखी थी। बच्चों के भविष्य से जुड़ी इस मांग को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
शिक्षा विभाग की टीम ने गांव का सर्वे कर 20 बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए पात्र पाया। इसके बाद अधिकारियों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने कठिन पहाड़ी रास्तों, नदी-नालों और जंगलों को पार करते हुए लगभग पांच घंटे पैदल चलकर कारकाबेड़ा पहुंचकर नवीन प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया।
स्कूल के पहले दिन ही सभी बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्लेट, पेंसिल, ब्लैकबोर्ड और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और खुशी साफ दिखाई दी।
सरपंच रामूराम वड्डे ने इसे गांव के लिए सपने के सच होने जैसा बताया। फिलहाल स्कूल के संचालन के लिए स्थानीय अतिथि शिक्षक की नियुक्ति की गई है। आने वाले समय में इस विद्यालय से आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों के बच्चों को भी लाभ मिलेगा।
कारकाबेड़ा में स्कूल का खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि अबूझमाड़ में शिक्षा, विकास और स्थायी शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।




