आदि उत्सव में गूंजा जनजातीय गौरव, गोंडवाना की विरासत और रानी दुर्गावती के शौर्य को मिला नमन

रायपुर। मध्यप्रदेश के मंडला में आयोजित भव्य आदि उत्सव जनजातीय संस्कृति, इतिहास, परंपरा और गौरवशाली विरासत का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया। पूरा आयोजन गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक धरोहर और आदिवासी अस्मिता को समर्पित रहा। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि रामनगर की मिट्टी इतिहास की खुशबू से महकती है और यह स्थल हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने इस पावन भूमि पर उपस्थित होना अपने लिए सौभाग्य बताया।
राज्यपाल ने कहा कि मंडला और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय की भागीदारी इस उत्सव के सामाजिक महत्व और लोकप्रियता को दर्शाती है। अब यह आयोजन नई पीढ़ी को जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन चुका है।
अपने संबोधन में उन्होंने गोंडवाना साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए वीरांगना रानी दुर्गावती, दलपत शाह, शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान को याद किया। साथ ही मिलेट्स फेस्टिवल की सराहना करते हुए कहा कि मोटे अनाज सदियों से जनजातीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और आज पूरी दुनिया इनके महत्व को समझ रही है।
कार्यक्रम में सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने आदि उत्सव की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला। मोतीमहल परिसर में पारंपरिक पूजा-अर्चना, पगड़ी और बीरन माला से अतिथियों का स्वागत किया गया। जनजातीय लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण दिया। विभिन्न विभागों और कलाकारों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।


