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एल नीनो की वापसी का खतरा: एशिया में सूखा, बाढ़ और खाद्य संकट की आशंका

वैश्विक मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एल नीनो (El Niño) की वापसी एशिया के कई देशों के लिए गंभीर चुनौतियां लेकर आ सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार 2026 के अंत तक एल नीनो विकसित होने की संभावना 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों पर पड़ सकता है।

भारत में एल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ने की आशंका है। यदि वर्षा सामान्य से कम होती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे खाद्यान्न कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। कई राज्यों में जल संकट भी गहरा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान, गेहूं और अन्य प्रमुख फसलों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

चीन में भारी बारिश और बाढ़ की संभावना जताई गई है। वहां के प्रशासन ने पहले से ही आपदा प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में सूखा, जंगलों में आग और वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो का संयुक्त प्रभाव पहले की तुलना में अधिक विनाशकारी साबित हो सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा, जल उपलब्धता और ऊर्जा उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। कई देशों ने आपदा प्रबंधन योजनाओं को सक्रिय कर दिया है ताकि संभावित संकट से निपटा जा सके।

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