‘रुकेंगे नहीं, भून डालेंगे!’– सऊदी अरब और अमेरिका की जुगलबंदी ने इराक में ईरानी मिलिशिया को किया नेस्तनाबूत, ईरान ने दी वैश्विक व्यापार ठप करने की धमकी!

ईरान और अमेरिका का यह टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले लिया है। पिछले 24 घंटों के भीतर, अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने एक साझा और गुप्त सैन्य ऑपरेशन चलाकर इराक में सक्रिय ईरान समर्थित ‘पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस’ (PMF) के मुख्यालयों पर एक दर्जन से अधिक हवाई हमले किए हैं। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि यह हमला ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ के तहत किया गया है, क्योंकि ईरानी मिलिशिया ने पिछले 72 घंटों में सऊदी अरब के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर 30 से ज्यादा आत्मघाती ड्रोन दागे थे। इस साझा हमले में इराक के भीतर बैठे दर्जनों ईरानी कमांडर मारे गए हैं।
होर्मुज और रेड सी में हाहाकार:
इराक में अपने गुर्गों पर हुए इस हमले से बौखलाए ईरान ने सीधे तौर पर पूरी दुनिया को आर्थिक चोट देने की धमकी दे डाली है। ईरान के कूटनीतिक हलकों से साफ कर दिया गया है कि अगर अमेरिका ने उसके हितों पर चोट पहुंचाई, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी अमेरिकी या उसके सहयोगी देश के व्यापारिक जहाज को सुरक्षित नहीं जाने दिया जाएगा। इधर, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर (Red Sea) में व्यापारिक जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया है कि वह ईरान के इस कूटनीतिक ब्लैकमेलिंग के आगे नहीं झुकेगा।
संभावनाएं:
यह कूटनीतिक गतिरोध और छद्म युद्ध (Proxy War) अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को डुबाने की कगार पर है। संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका लाल सागर और होर्मुज में ईरान की पूरी नौसैनिक घेराबंदी (Blockade) कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी और खाड़ी देश सीधे तौर पर अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर देंगे।


