औषधीय खेती से किसानों की बढ़ेगी कमाई, 54.36 लाख की अग्रिम प्रोत्साहन राशि जारी

छत्तीसगढ़ में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती से जोड़ने की पहल तेज हो गई है। अश्वगंधा, शतावर, एलोवेरा, तुलसी और लेमनग्रास जैसी फसलों की खेती किसानों के लिए कम लागत और बेहतर आमदनी का विकल्प बन रही है। इन फसलों में पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी, रासायनिक खाद और अन्य संसाधनों की जरूरत कम होती है, जबकि बाजार में इनकी मांग लगातार बनी हुई है।
हरेली तिहार की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ शासन ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों और स्व-सहायता समूहों को बड़ी सौगात दी। वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) और धमतरी जिले के किसानों व स्व-सहायता समूहों को कुल 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की गई।
राजधानी स्थित राज्य वन अनुसंधान भवन, जीरो पॉइंट में आयोजित कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने की। उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला और विधायक अनुज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
हरेली पर किसानों को मिला आर्थिक संबल
केदार कश्यप ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक मुनाफे वाला विकल्प बनकर उभर रही है। इसमें पानी की जरूरत कम होती है और कीटनाशकों पर खर्च भी बेहद कम रहता है। खेत की मेड़ों पर औषधीय पौधे लगाकर किसान अपनी अतिरिक्त आय भी बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे अवसर पर किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए अग्रिम प्रोत्साहन राशि देना उनके लिए आर्थिक मजबूती का उपहार है।
50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण पर काम
बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री के मार्गदर्शन में औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने, वैद्यों की क्षमता बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी करीब 50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन की पहल भी शुरू की गई है।
बोर्ड उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने कहा कि वनौषधियां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली की महत्वपूर्ण आधार हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में लोग प्राकृतिक औषधीय पौधों का इस्तेमाल करते हैं।
किसानों को मुफ्त पौधे और खरीद की सुविधा
बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि औषधीय पौधों की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को निशुल्क पौधे उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपज की खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उन्हें बाजार की समस्या का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) के 25 किसान, धमतरी के 18 किसान और 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि दी गई। यह राशि बोर्ड से अनुबंधित संस्थाओं मेसर्स स्टीविया और इंस्टा हर्ब्स के माध्यम से प्रदान की गई।
सरकार की यह पहल औषधीय खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत करने और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य विरासत को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।




