फर्जी चुनावों के खिलाफ PoJK की जनता सड़कों पर; पाकिस्तानी फौज के दमन के खिलाफ उग्र विरोध

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में फर्जी चुनावों और स्थानीय अधिकारों के हनन के खिलाफ सुलग रही चिंगारी अब एक बड़े विद्रोह में बदल चुकी है। प्रशासनिक दमन, इंटरनेट शटडाउन और सेना की बंदूकों के साए में कराए जा रहे इन तथाकथित चुनावों का स्थानीय जनता ने व्यापक स्तर पर बहिष्कार किया है।
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले एकजुट हुए छात्रों, व्यापारियों और आम नागरिकों ने पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। चुनाव प्रक्रिया और शरणार्थी सीटों के प्रावधानों को लेकर स्थानीय जनता में इस कदर गुस्सा है कि सुरक्षा बलों के साथ हुई हिंसक झड़पों में दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।
लोकतंत्र का मखौल: पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा असंतोष की आवाज़ों को कुचलने के लिए जिहादी और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
चुनावों का बॉयकॉट: स्थानीय नागरिकों और मतदाताओं ने साफ कह दिया है कि ऐसी चुनावी प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं है जो जनता के बुनियादी अधिकारों को कुचलकर थोपी जा रही हो।
मानवाधिकारों का हनन: संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी PoJK के हालात पर चिंता जताई है, लेकिन पाकिस्तानी फौज अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही।
पाकिस्तान ने हमेशा से PoJK के संसाधनों का दोहन किया है और वहां के मूल नागरिकों को दोयम दर्जे का नागरिक माना है। अब वहां की जनता खुलकर पाकिस्तान के अवैध कब्जे के खिलाफ मुखर होने लगी है।
संभावित असर: इस अंदरूनी बगावत और चुनावों के बहिष्कार से पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्दाफाश हो रहा है। PoJK में बढ़ता यह अलगाववादी और असंतोष का दौर पाकिस्तान के विघटन की नींव मजबूत कर रहा है।


