व्हाइट हाउस के फरमान पर फेडरल कोर्ट का करारा चाबुक: विदेशी छात्रों और पत्रकारों पर अमेरिकी तानाशाही रुकी!

15 सितंबर से लागू होने वाले कड़े वीजा प्रतिबंधों पर मैसाचुसेट्स की एक फेडरल कोर्ट ने ऐन वक्त पर रोक लगाकर अमेरिकी प्रशासन के मुंह पर जोरदार तमाचा जड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पत्रकारों की आजादी को छीनने वाले काले नियमों को जज ने खारिज कर दिया।
15 सितंबर से अमेरिका का होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) विदेशी छात्रों (F-1 वीजा) के लिए दशकों पुराने ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ नियम को खत्म कर अधिकतम 4 साल की समय सीमा थोपने जा रहा था। इतना ही नहीं, पढ़ाई खत्म होने के बाद ग्रेस पीरियड को भी 60 दिनों से घटाकर जबरन 30 दिन किया जाना था। इस फैसले से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लाखों भारतीय और विदेशी छात्रों की गर्दन पर तलवार लटक गई थी। लेकिन कोर्ट के इस इमरजेंसी स्टे ने प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा जड़ते हुए फिलहाल इस निरंकुश फैसले पर ब्रेक लगा दिया है।
यह अदालती आदेश साबित करता है कि प्रवासियों के पसीने पर पलने वाला अमेरिका अब उन्हीं के खिलाफ नीतियां बनाकर अपनी ही साख मिटाने पर तुला है।



