महिला स्व-सहायता समूह बना रहे पोषण आहार, हजारों महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक अभिनव पहल शुरू की है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण और वितरण की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया अवसर मिला है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। पहले यह कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से कराया जाता था, लेकिन अब गांव की महिलाएं स्वयं उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और वितरण का जिम्मा संभाल रही हैं।
योजना के पहले चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलों के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को यह जिम्मेदारी दी गई है। इन समूहों से जुड़कर हजारों महिलाओं को स्थायी आजीविका मिली है।
रायगढ़ जिले में राज्य का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन केंद्र शुरू हुआ। कोरबा और रायगढ़ में 10-10, सूरजपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 समूह इस कार्य में सक्रिय हैं।
सूरजपुर जिले के संयंत्रों में महिलाएं नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इनमें विटामिन ए, डी, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी हैं।
यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। महिलाओं को मशीन संचालन, लेखा प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को साकार कर रहा है।




